Monday, 24 November 2014

आज कुछ माहिया .शायद आपको पसंद आये


हर ओर दिवाली है
घर तो सूना है
 और जेब  खाली है
२
चौखट पर दीप जले
मन अँधियारा है
नीले गगन के तले
३
तुम आज चले आना
मन के चौखट  पर
 दीप जला  जाना
४
बापू उदास लेटे
पटाखे मत मांग
चुप हो जा तू बेटे
५
दो दिन से काम नहीं
आज  दिवाली है
देने को दाम नहीं
६
हमको  आराम नहीं
दुआ  गरीबों की
सुनते क्यों राम नहीं
मन अँधेरा
दिए जलने से क्या
मिट जायेगा
२
दब गयी थी
पटाखों के शोर में
चीख उसकी
३
दीप जलाओ
पडोसी के चौखट
बाँटो खुशियाँ
४
ज्ञान का डीप
हर आँगन चले
इस दीवाली
५
मन हो साफ
घर के साथ साथ
इस दिवाली
६
हवा न रोये
धुंए के जहर से
इस दिवाली
७
धरा लजाये
दुल्हन सी सजे के
घूँघट ओढ़े
८
बम का शोर
बंद कर के कान
धरती बैठी
९
जला आनर
अम्बर  खिड़की से
झांके है चाँद
१०
सभी बुलाएँ
लक्ष्मी जाएँ किधर
सोच में पड़ी