मेरा साहित्य
जीवन की अनुभूतियों और चिन्तन का दर्पण
Tuesday, 17 April 2012
पंकज उधास जी का साक्षात्कार इस लिंक पर भी पढ़ सकते हैं
http://www.hindimedia.in/2/index.php/manoranjanjagat/bat-mulakat/1887-i-never-bhulta-as-rs-18000-pankaj-udhas.html
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/12688288.cms
Sunday, 25 March 2012
पुराने पल
पुराने पल
शाखों से झड़ते रहे
आज, कल और कल
एक मैली सी
गठरी में
कुछ सहेज के रखा था
कुछ पल थे
यादों के
गम कोई जो खटका था
पीड़ा के शूल
दिलों में गड़ते रहे
आज, कल और कल
बीते लम्हे
खोले तो
झरना सा बह उठा
भीगा
स्पर्श तुम्हारा
हौले से कह उठा
नाहक तुम
अतीत से लड़ते रहे
आज कल और कल
पुराने पल
शाखों से झड़ते रहे
आज, कल और कल
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