Friday, 27 January 2012

बादलों की धुंध में

बादलों की धुंध में
सूरज मुस्काये
खोल किवाड़ हौले  से
वो   धरा पर आये
गुनगुनी धूप दे
स्वेटर सा आराम
अब तो भैया मस्ती में  हो
अपने सारे काम
बांध  गठरिया आलस भागे
ट्रेन -टिकट कटाए
 बादलों की धुंध में
सूरज मुस्काये 

 पतंगों  के पेंच लड़े
और लड़े नैन
दिन में जोश भरा रहा
खामोश रही रैन
सुनहरी धूप  में
मन- चिड़िया  नहाये
 बादलों की धुंध में
सूरज मुस्काये

अधमुंदी आँखें खोले
सोया सोया गाँव  
किरणें द्वार द्वार पर डोले
देखो नंगे पाँव
मधुर मधुर मुस्काती अम्मा
गुड का पाग पकाए
बादलों की धुंध में
सूरज मुस्काये 

26 comments:

  1. अधमुंदी आँखें खोले
    सोया सोया गाँव
    किरणें द्वार द्वार पर डोले
    देखो नंगे पाँव
    मधुर मधुर मुस्काती अम्मा
    गुड का पाग पकाए
    बादलों की धुंध में
    सूरज मुस्काये
    वाह ...वेहतरीन रचना, बेहद पसंद आई,शुभकामनायें

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  2. वाह! बहुत सुन्दर रचना! बेहद पसंद आया!

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  3. सुन्दर एवं सराहनीय रचना....
    कृपया इसे भी पढ़े
    नेता,कुत्ता और वेश्या

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  4. सुंदर भावों से भरी खुबशुरत पंक्तियाँ,बहुत सुंदर रचना,लाजबाब प्रस्तुती.....
    .
    MY NEW POST ...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

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  5. बहुत सुन्दर रचना है.

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  6. वाह!!!!!बहुत सुंदर सराहनीय प्रस्तुति ,अच्छी रचना

    NEW POST....
    ...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...

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  7. पतंगों के पेंच लड़े
    और लड़े नैन
    दिन में जोश भरा रहा
    खामोश रही रैन
    सुनहरी धूप में
    मन- चिड़िया नहाये
    बादलों की धुंध में
    सूरज मुस्काये

    behad sundar rachana bahut hi sundar bhavon ka sanyojan..badhai ke sath abhar.

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  8. लाजबाव प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  9. bahut hi sundar rachna hai,pahli baar aap ke blog par aana hua,acha lga,kabhi wqt mile to mere blog par bhi pdhariyega

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  10. लाजबाव प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  11. समय के साथ संवाद करती हुई आपकी यह प्रस्तुति बहुत ही अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "भीष्म साहनी" पर आपका बेशब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  12. पतंगों के पेंच लड़े
    और लड़े नैन
    दिन में जोश भरा रहा
    खामोश रही रैन
    सुनहरी धूप में
    मन- चिड़िया नहाये
    बादलों की धुंध में
    सूरज मुस्काये

    बहुत सुंदर ... हम भी मुस्का रहे हैं :)

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  13. पतंगों के पेंच लड़े
    और लड़े नैन
    दिन में जोश भरा रहा
    खामोश रही रैन
    सुनहरी धूप में
    मन- चिड़िया नहाये
    बादलों की धुंध में
    सूरज मुस्काये
    ...
    khubsurat rachna muskura rahi hai:)

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  14. geet pasand karne ke liye aap sabhi ka dhnyavad
    rachana

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  15. सुन्दर ,लाजबाव प्रस्तुति ...आप को शिव रात्रि पर हार्दिक बधाई..

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  16. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये.

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  17. आपकी कविता अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  18. कविता अच्छी लगी । मेरे पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  19. BILKUL LAJABAB .....BEHAD PRABHAVSHALI PRASATUTI ...SADAR ABHAR.

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  20. बहुत बढ़िया सराहनीय प्रस्तुति,सुंदर रचना के लिए बधाई .

    NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

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  21. बहुत ही सुन्दर रचना है ... भावों को शब्दों से बाँधा है ...

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  22. सुनहरी धूप में
    मन- चिड़िया नहाये
    बादलों की धुंध में
    सूरज मुस्काये

    बहुत कोमल...बहुत सुन्दर भाव...
    हार्दिक बधाई..

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  23. .


    बहुत सुंदर रचना के लिए आभार!

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    ♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
    ♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



    आपको सपरिवार
    होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
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